मृतक की पत्नी ममता व प्रेमी रमेश ने रची थी हत्या की साजिश, मजदूरी दिलाने के बहाने ले जाकर की वारदात
जालोर/छगन मीणा
आहोर थाना क्षेत्र के चरली -मंडला सड़क निकट हुए राजेन्द्र मीणा हत्याकांड की गुत्थी पुलिस ने 48 घंटे में सुलझा ली है। आहोर पुलिस ने इस ब्लाइंड मर्डर का पर्दाफाश करते हुए मृतक की पत्नी के प्रेमी सहित दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। प्रेम प्रसंग के चलते इस हत्याकांड की साजिश रची गई थी।
अवैध संबंधों में बाधक बनी हत्या की साजिश
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 24 जून को आहोर थाना क्षेत्र की सरहद मंडला में एक अज्ञात शव मिला था। शिनाख्त रानी थाना क्षेत्र के रानीगांव निवासी राजेन्द्र कुमार (पुत्र स्व. ओटाराम मीणा) के रूप में हुई। पुलिस जांच में सामने आया कि राजेन्द्र की पत्नी ममता पिछले 8-10 माह से मनमुटाव के कारण अपने पीहर (गोलिया) में रह रही थी। वहां ममता की मुलाकात रमेश मीना से हुई और दोनों के बीच प्रेम प्रसंग शुरू हो गया। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन राजेन्द्र उनके रास्ते में रोड़ा बन रहा था, इसलिए ममता और रमेश ने मिलकर उसे रास्ते से हटाने की साजिश रची।
मजदूरी का बहाना बनाकर मृतक को साथ ले गए आरोपी
योजना को अंजाम देने के लिए रमेश अपने रिश्तेदार अभिषेक मीणा के साथ रानीगांव पहुंचा। दोनों ने राजेन्द्र को मजदूरी दिलाने का झांसा दिया और उसे अपनी मोटरसाइकिल पर बैठाकर अपने साथ ले गए। रास्ते में राजेन्द्र को कई बार शराब पिलाई गई और फिर आहोर के मंडला की सरहद में ले जाकर दोनों ने मिलकर उसकी हत्या कर दी।
मां ने दर्ज करवाई थी नामजद रिपोर्ट
इस घटना के बाद मृतक की माता सारकी देवी ने 25 जून को पत्नी ममता और उसके पीहर पक्ष (नटवर, पकाराम, जैताराम व अन्य) के खिलाफ हत्या की आशंका जताते हुए आहोर थाने में प्रकरण दर्ज करवाया था।
तकनीकी साक्ष्यों से खुला राज
जालौर पुलिस अधीक्षक मोटाराम व वृताधिकारी दशरथसिंह के निर्देशन में आहोर थानाधिकारी कर्णसिंह के नेतृत्व में टीम गठित की गई थी। टीम ने एफएसएल और एमओबी की मदद से घटनास्थल का निरीक्षण किया। मृतक की पत्नी ममता के मोबाइल नंबरों की कॉल डिटेल खंगाली गई। साइबर सेल और तकनीकी संसाधनों के आधार पर पुलिस रमेश कुमार मीणा और अभिषेक मीणा तक पहुंची और दोनों को दस्तयाब कर लिया। पूछताछ में दोनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है।
कार्रवाई में ये पुलिसकर्मी रहे शामिल
इस पूरी कार्रवाई में आहोर थानाधिकारी कर्णसिंह, भाद्राजून थानाधिकारी लालाराम, नरपतसिंह, रणजीतसिंह, मुगाराम, रघुनाथ, भजनलाल, महेश कुमार, केसाराम, पुनित देवासी, पुखराज, सुरेश मेंशन और ओमप्रकाश शामिल रहे। प्रकरण को ट्रेस आउट करने में साइबर सेल जालौर के बहादुखा, किशन गहलोत और सुभाष दिशानिया की विशेष भूमिका रही।

