सिरोही – (रमेश टेलर) श्री क्षत्रिय युवक संघ द्वारा राष्ट्रनायक वीर दुर्गादास राठौड़ जयन्ती पर दायित्व बोध पखवाड़े के चौथे दिन सिरोही शहर के महाराव सुरताण राजपूत छात्रावास में कार्यक्रम मनाया गया।
कार्यक्रम का शुभारम्भ चन्द्रवीर सिंह लूणोल द्वारा प्रार्थना- “क्षत्रिय कुल में प्रभु जन्म दिया तो…!”
संघ के प्रांतीय विस्तारक वीरबहादुर सिंह असाड़ा ने राष्ट्रनायक के जीवन से प्रेरणा लेकर दायित्व बोध को जीवन में उतारने की बात कही। उन्होंने बताया कि एक सामान्य राजपूत के घर जन्म लेकर इसी कर्तव्य बोध के कारण वे साधारण से असाधारण बन गए जो मध्यकालीन इतिहास में अपने आप मे एक अनोखा उदाहरण है। हमारी युवा पीढ़ी में दुबारा ऐसे चरित्र का निर्माण हो उसके लिए हमें संघ की शाखा एवं शिविरों के माध्यम से संघ से जुड़ना होगा।
कार्यक्रम में डॉ. उदय सिंह डिंगार ने दुर्गादास जी के जीवन परिचय पर प्रकाश डाला। जयंती की सार्थकता इस बात में है कि महापुरुषों के यह आदर्श गुण हमारे जीवन मे भी आये। उनके द्वारा लड़ी युद्ध प्रणाली को बताते हुए कहा कि वो बड़े धैर्यशील व्यकित्व के धनी थे जिन्होंने लंबे संघर्ष को झेलते हुए अजीतसिंह जी को राज गद्दी पर बैठाया। कार्यक्रम में चक्रवर्ती सिंह पालडी एम., सुमेर सिंह उथमण ने भी संबोधित किया। महिपाल सिंह केसुआ ने पूज्य श्री तन सिंह जी द्वारा लिखित ‘क्षीप्रा के तीर’ निबंध का पठन किया। कार्यक्रम का संचालन अमरसिंह चाँदणा ने किया।
जयंती समारोह के इस कार्यक्रम में प्रियवर्धन राडबर, कुलदीप सिंह विरोली, नाहर सिंह जाखड़ी, खुशपाल सिंह उथमण सहित सैकड़ों की संख्या में क्षेत्र के प्रबुद्ध जन, युवा, मातृ शक्ति उपस्थित रहीं।
दुर्गादास राठौड़ जयंती दायित्व बोध पर चल रही कार्यक्रमों की श्रृंखला

