जिला कलक्टर श्री रोहिताश्व सिंह तोमर ने किया ‘रोशनी अभियान’ का शुभारंभ

बालिकाओं को एनीमिया मुक्त बनाने की अभिनव पहल, ‘रोशनी अभियान’ के लोगो का भी हुआ विमोचन

सिरोही – (रमेश टेलर) जिले की किशोर बालिकाओं में एनीमिया की रोकथाम, हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार एवं बेहतर स्वास्थ्य सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला कलक्टर श्री रोहिताश्व सिंह तोमर के नवाचार ‘रोशनी अभियान’ का शुभारंभ बुधवार को दोपहर 12 बजे जनजाति बालिका आश्रम छात्रावास, सिरोही में किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ जिला कलक्टर श्री तोमर द्वारा मां सरस्वती के पूजन से किया गया। इसके पश्चात अतिथियों का स्वागत किया गया। महिला अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक श्री योगेन्द्र देथा ने रोशनी अभियान के उद्देश्य, कार्ययोजना एवं विभिन्न गतिविधियों की विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर छात्रावास की बालिकाओं द्वारा आकर्षक नृत्य प्रस्तुति दी गई।

‘रोशनी अभियान’ के लोगो का हुआ विमोचन

इस अवसर पर जिला कलक्टर श्री रोहिताश्व सिंह तोमर एवं उपस्थित अतिथियों द्वारा ‘रोशनी अभियान’ के लोगो का विमोचन भी किया गया। अभियान का संदेश “एनीमिया मुक्त सिरोही अभियान – स्वस्थ बालिका, सशक्त सिरोही” है तथा इसके माध्यम से जागरूकता, पोषण एवं उपचार पर विशेष जोर दिया जाएगा।

क्या है ‘रोशनी अभियान’

‘रोशनी अभियान’ जिला कलक्टर श्री रोहिताश्व सिंह तोमर का नवाचार है, जिसका प्रमुख उद्देश्य किशोर बालिकाओं में एनीमिया की पहचान कर नियमित स्वास्थ्य जांच, उपचार, पोषण संबंधी जागरूकता एवं सतत फॉलो-अप के माध्यम से उनके हीमोग्लोबिन स्तर में सुधार करना है।

अभियान को दो चरणों में संचालित किया जाएगा। प्रथम चरण में जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग तथा शिक्षा विभाग के कुल 19 बालिका छात्रावासों में निवासरत 1,705 बालिकाओं को कवर किया जाएगा। यह चरण 15 अक्टूबर तक चलेगा।

द्वितीय चरण में अभियान का विस्तार करते हुए सिरोही जिले के सभी विद्यालयों में अध्ययनरत किशोर बालिकाओं को शामिल किया जाएगा।

अभियान के तहत प्रत्येक बालिका का व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड निर्धारित रजिस्टर में संधारित किया जाएगा। बालिकाओं की प्रतिमाह हीमोग्लोबिन एवं स्वास्थ्य जांच की जाएगी तथा प्रत्येक जांच का रिकॉर्ड दर्ज कर स्वास्थ्य में हो रहे सुधार की नियमित मॉनिटरिंग की जाएगी।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य जांच के साथ आवश्यकतानुसार आयरन फोलिक एसिड (IFA), एल्बेंडाजोल एवं मल्टीविटामिन आदि दवाइयां उपलब्ध कराई जाएंगी। छात्रावास वार्डन द्वारा दवाइयों के नियमित सेवन एवं बालिकाओं के स्वास्थ्य रिकॉर्ड की मॉनिटरिंग की जाएगी।

अभियान में केवल दवा वितरण ही नहीं, बल्कि संतुलित एवं पौष्टिक आहार, एनीमिया से बचाव, हाथों की स्वच्छता एवं साफ-सफाई के संबंध में जागरूकता गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। बालिकाओं में स्वस्थ खान-पान एवं जीवनशैली विकसित करने के लिए नियमित काउंसलिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे।

अभियान का नोडल विभाग महिला अधिकारिता विभाग रहेगा, जो विभिन्न विभागों के समन्वय के साथ बालिकाओं की काउंसलिंग, जागरूकता एवं IEC गतिविधियों का संचालन करेगा।

अभियान के प्रभाव का आकलन करने के लिए बालिकाओं के प्रारंभिक हीमोग्लोबिन स्तर का रिकॉर्ड रखते हुए आगे की जांचों से इसकी तुलना की जाएगी। अभियान के अंत में पुनः Hb जांच कर यह आकलन किया जाएगा कि बालिकाओं के हीमोग्लोबिन स्तर एवं स्वास्थ्य में कितना सुधार हुआ है।

साथ ही चयनित बालिकाओं को ‘रोशनी एम्बेसडर’ के रूप में प्रोत्साहित करने की परिकल्पना की गई है, ताकि वे अपनी साथी बालिकाओं को पोषण, एनीमिया की रोकथाम एवं स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक कर सकें।

छात्रावास में रहने के अवसर का पूरा लाभ उठाएं — जिला कलक्टर

जिला कलक्टर श्री तोमर ने बालिकाओं को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रावास में रहकर अध्ययन करना उनके लिए एक महत्वपूर्ण अवसर है और उन्हें इसका पूरा लाभ उठाना चाहिए। घर पर अनेक कार्य रहने के कारण कई बार पढ़ाई के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है, जबकि छात्रावास में रहकर वे अपना पूरा ध्यान पढ़ाई पर केंद्रित कर सकती हैं।

उन्होंने बालिकाओं से कहा कि जीवन में अपना लक्ष्य निर्धारित करना आवश्यक है, क्योंकि लक्ष्य आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। लेकिन प्रतिदिन प्रेरित रहकर लक्ष्य हासिल करने के लिए अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण है। समय पर उठना, समय पर पढ़ना, समय पर खेलना और प्रत्येक कार्य को निर्धारित समय पर करना अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
जिला कलक्टर ने एनीमिया से ग्रसित बालिकाओं को नियमित रूप से आयरन की गोली लेने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि इससे शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ाने में मदद मिलेगी।

बालिकाओं का उत्साहवर्धन करते हुए उन्होंने अपने छात्र जीवन का उदाहरण दिया और बताया कि उन्होंने भी सरकार के सैनिक स्कूल में रहकर पढ़ाई की है। उन्होंने कहा, “आप सभी भी सरकारी छात्रावास में रहकर पढ़ाई कर रही हैं। आप किसी से कम नहीं हैं। यदि आप लक्ष्य निर्धारित कर अनुशासन और मेहनत के साथ आगे बढ़ें तो जीवन में जो चाहें, वह बन सकती हैं।”

खून की कमी से थकान और पढ़ाई में एकाग्रता की कमी — डॉ. दिनेश खराड़ी

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. दिनेश खराड़ी ने बालिकाओं को एनीमिया के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि शरीर में खून की कमी होने पर थकान बनी रहती है, पढ़ाई में मन नहीं लगता तथा भूख भी कम लग सकती है।

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