मारवाड़ के रॉबिनहुड पदिया मीणा को 139वें बलिदान दिवस पर किया याद, जोधपुर में मीणा समाज ने दी श्रद्धांजलि


जोधपुर। 1857 की क्रांति से जुड़े आदिवासी जननायक एवं मारवाड़ के रॉबिनहुड के नाम से प्रसिद्ध वीर योद्धा पदिया मीणा का 139वां बलिदान दिवस गुरुवार को श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। इस अवसर पर देशभर में लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर उनके संघर्ष, साहस और योगदान को याद किया।

इसी क्रम में 5 नवंबर 2026 को जोधपुर में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मीणा समाज के लोगों ने वीर योद्धा पदिया मीणा को पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। कार्यक्रम में सेदरिया के जोरा राम मीणा, दयालपुरा के सुरेश कुमार मीणा, सेदरिया के रविपाल सिंह मीणा, रामा के हीरा राम मीणा एवं मदन सिंह मीणा, कालूराम मीणा, ओम मीणा, दीपा राम मीणा, कुआंड़ा के हीरा राम मीणा, झाला राम मीणा तथा जोगनी के जोगराम मीणा सहित समाज के कई लोग उपस्थित रहे।

◆ अन्याय के खिलाफ संघर्ष की मिसाल थे पदिया मीणा –
उपलब्ध ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार पदिया मीणा का जन्म वर्ष 1836 में वर्तमान जालोर जिले के भाद्राजून क्षेत्र में हुआ था। उन्हें अंग्रेजी शासन और तत्कालीन सामंती व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष करने वाले जननायक के रूप में याद किया जाता है। गरीबों और वंचितों की मदद करने तथा अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने के कारण उन्हें ‘मारवाड़ का रॉबिनहुड’ कहा जाता है।
बताया जाता है कि अंग्रेजी हुकूमत ने 5 नवंबर 1887 को जोधपुर में उन्हें फांसी दे दी थी। उनके बलिदान को आज भी आदिवासी स्वाभिमान, साहस और संघर्ष के प्रतीक के रूप में याद किया जाता है।
इस अवसर पर वक्ताओं एवं समाजजनों ने पदिया मीणा के इतिहास और योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा उनके जीवन संघर्ष को इतिहास और शैक्षणिक पाठ्यक्रमों में उचित स्थान देने की आवश्यकता जताई।

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